जिंदगी आज कल

प्रिय मित्रगणों,
  • जिंदगी का सफर भी कितना उतार-चढ़ाव भरा होता है | कभी हमें यह ढेर सारी खुशी दे जाता है और कभीइतना गम की शरीर निर्जीव सा हो उठता है | मुझे अब दोनों ही पल जीने में मजा आता है और प्रयास करता हूँ की हर पल कोसहजता से जियूं | पर अभी ऐसा हो नही पाता है
  • हमारे देश को स्वतंत्र हुए ६१ वर्ष से भी अधिक हो गया है पर वर्तमान में घटित कुछ घटनाओं ने मुझे यह विचार करने पर मजबूर कर दिया की कौन आजाद है --
    हरियाणा में 'जाति' के विवाद में हुआ बवाल, न्यायालय के आदेश की अवमानना| क्या यही सपना था हमारे स्वतंत्रता सैनानियों का ? मुझे कभी-कभी बहुत आश्चर्य होता है की स्नातक ( में तो उनको स्नातक मानता ही नही ) किए हुए लोग भी काले-गोरे , जाति और अन्य कारणों से भेद-भावः करते हैं और समर्थन करते हैं | हम बातें तो बड़ी-बड़ी करते हैं पर जब असल वक़्त आता है तो किसी कोने में दुबक कर बैठ जाते हैं | किसी को अपने आपको किसी उच्च वर्ग या जाति का कहलाने का घमंड है तो किसी को सरकार की सुविधा पाये विशेष वर्ग से होने का गुमान है | हमें अभी और कितना वक़्त लगेगा "आजाद" होने में | काफी कुछ हुआ है पर बहुत कुछ करना बाकी है | मौकापरस्त नेताओं ने सोशल इंजीनियरिंग के आड़ में भेदभाव फैलाना शुरु कर दिया है | ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसितदेश में भी हमें रंगभेद देखने को मिल रहा है | प्यार-मोहबत में ही मेरे कितने मित्रों का दिल टुटा वजह सिर्फ़ जाति का समान नहीं होना | बहुत मोह-माया है ................
  • हाल में आयी CAG रिपोर्ट से पता चलता है की हमारे सेना में कितना भ्रष्टाचार है | पुराना युद्धपोत ख़रीदा गया वो भी नए के दाम से ६०% अधिक दाम पर | यह कोई मामूली जुर्म नहीं है | देश की सुरक्षा के साथ खेला जा रहा है | आशा करता हूँ की दोसी आफिसरों पर सख्त कार्यवाही होगी |
जिंदगी का सफर है ये कैसा सफर ............................................

मुंबई दर्शन

१ जुलाई को मैं अपने माता, पिता और भाई के साथ मुंबई दर्शन के लिए निकला | हमने कार्निवाल मुंबई दर्शन बस सेवा की सहायता से यह सफर पूरा किया | खास बात यह है की हमें यह बस सेवा अपने घर के समीप से मिल जाती है | सफर का आरम्भ गेट वे ऑफ़ इंडिया ( भारत का प्रवेश द्वार ) से हुआ | हमने करीब ३० मिनट वंहा बिताये | हमने ताज होटल पर हुए आतंकवादी हमले के बारे मैं आपस मैं चर्चा किया | इसके बाद हम लोग तारापुर मत्स्यालय गए पर बिजली ना होने क कारण हमे वंहा से लौटना पड़ा | फ़िर हम हँगिंग और बूट उद्यान गए | गाइड हमें रास्ते मैं पड़ने वाले स्थलों के बारे मैं जानकारी देते जा रहा था | सफर का अगला मंजिल महालक्ष्मी मन्दिर था | इसके बाद हम वरली इलाके मैं अटरिया मॉल में 4d फ़िल्म देखने गए | २५ मिनट की फ़िल्म का सभी ने खूब लुत्फ़ उठाया | इसके बाद हम नेहरू विज्ञानं केन्द्र गए | केन्द्र काफी भव्य और विशाल है | यंहा पर विज्ञानं सम्बंधित अनेकों प्रयोगों के मॉडल प्रर्दशित किया गया है | ४० मिनट में हम इस जगह का केवल अवलोकन ही कर पाये | हमने बांद्रा वरली सी लिंक पर सफर का मज़ा लिया | गाइड ने हमें रास्ते में पड़ने वाले सभी फ़िल्म कलाकारों के बंगलों को भी दिखाया | सफर का आखिरी बिन्दु जुहू चौपाटी था | शाम का समय चौपाटी पर हमने सागर के किनारे काफ़ी समय व्यतीत किया | सागर की लहरें , ठंडी ठंडी हवा और चटपटा नाश्ते का हम सभी ने भरपूर अनुभव किया | शाम के ७ बज चुके थे बस अब सबको जल्दी से अपने घर वापस पहुँचने की चाहत थी |

बिना बस सर्विस के यह सफर असंभव था | अकेले एक-एक जगह जाना मंहगा पड़ता और काफी समय भी लगता | मुंबई की भीड़ के बारे में तो आप सब लोग जानते ही हैं |

मुसाफिर हूँ मैं यारों .....