सरकार हमारी कुछ यूँ इतराती है !!




सरकार हमारी कुछ यूँ इतराती है !!

दिन के उजालों  में भ्रस्टाचार विरोधी  प्रश्नों  से डरती है !
सरल समस्याओं का जटिल विकल्प निकालती है !
रात के नशे में निर्दोषों को कुचलती है !
पांच साल का करार दिखाती है !
अपने को सब से अच्छा बताती है !
सरकार हमारी कुछ यूँ इतराती है !
सरकार हमारी कुछ यूँ इतराती है !!
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इस समस्या का शांतिपूर्ण हल निकल सकता था !
४-५ की रात  जो भी हुआ उससे मुझे बहुत दुख पहुंचा है !!
समस्या को समाप्त करने का तरीका निंदनीय है !!


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तुम मुझे याद आए

एक बुद्धिमान और खूबसूरत दोस्त को समर्पित !!

जाने क्यों वो मंदिर , वो कश्ती ,  वो झूले याद आए !
जाने क्यों तुम्हारे साथ बिताए वो पल याद  आए !
जाने क्यों वो  अधूरे  अरमान याद आए !
जाने क्यों ...  .. ... तुम मुझे याद आए..  !!  :)  :)  :)